आईएएस अधिकारी दुल्हन ने तोड़ी रूढ़िवादी प्रथा, अपनी शादी में 'कन्यादान' से किया इनकार

हाल ही में, एक 'आईएएस' अधिकारी दुल्हन ने शादी की 'कन्यादान' रस्म के लिए इनकार कर दिया, जिसे उनके परिवार के सभी सदस्यों और उनके दूल्हे ने भी स्वीकार किया था। आइए आपको इसके बारे में बताते हैं।

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By Deeksha Priyadarshi Last Updated:

आईएएस अधिकारी दुल्हन ने तोड़ी रूढ़िवादी प्रथा, अपनी शादी में 'कन्यादान' से किया इनकार

शादी का दिन किसी के भी जीवन में सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक होता है। अपनी शादी को लेकर हर किसी का सपना होता है कि, वो अपनी शादी को बेहतर से बेहतर तरीके से व्यवस्थित कर पाए। वो उसी तरह सभी परंपराओं और रीति-रिवाजों को निभा सकें, जैसे उनके माता-पिता ने पुराने समय में निभाया था। लेकिन, समय बदल रहा है और नई पीढ़ी की मानसिकता भी बदल रही है। कई पुराने रीति-रिवाजों को बदला जा चुका है और कई रीति-रिवाजों में बदलाव लाने के लिए विचार-विमर्श की जरूरत है।

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हिंदू विवाह में एक रस्म होती है, जिसे हम 'कन्यादान' कहते हैं। यह दुल्हन के पिता द्वारा किया जाने वाला एक रिवाज है, जहां दुल्हन का हाथ दूल्हे के हाथ में सौंपा जाता है और कहा जाता है कि, आज से हमारी कन्या आपकी हुई। हाल ही में, इस रीति को दिखाते हुए आलिया भट्ट ने 'मोहे' के लिए एक विज्ञापन किया था, जिसमें वो 'कन्यादान' की नहीं 'कन्यामान' की बात कहती नजर आ रही थीं। तब से इस रस्म को लेकर काफी चर्चा हो रही है। विज्ञापन में उस रस्म के बारे में बताया गया था कि, हमारे समाज में एक लड़की को एक सामान के रूप में देखा जाता है, जिसे बाद में दूल्हे के परिवार को विरासत में सौंप दिया जाता है। 

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इस विज्ञापन में दुल्हन की भूमिका निभाने वाली आलिया भट्ट कहती हैं, चलो अब से 'कन्यादान' के बजाय 'कन्यामान' (दुल्हन का सम्मान) पर विश्वास करते हैं। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के जोबा गांव से भी ठीक ऐसा ही वाकया सामने आया है। यहां, एक 'आईएएस' अधिकारी दुल्हन तपस्या परिहार की शादी एक 'आईएफएस' अधिकारी गर्वित गंगवार से हुई, जिसमें दुल्हन ने कन्यादान की रस्म का हिस्सा बनने से इनकार कर ऐसी रूढ़िवादी सोच को तोड़ने की कोशिश की है। 

'आजतक' की एक रिपोर्ट के अनुसार, 'आईएएस' तपस्या ने अपने पिता से कहा, "मैं दान की वस्तु नहीं हूं। मैं आपकी बेटी हूं।" मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला कि, तपस्या बचपन से पितृसत्तात्मक रीति-रिवाजों के खिलाफ हमेशा अपनी आवाज उठाती रही हैं। वह घर में अक्सर कन्यादान को लेकर सवाल करती थीं कि, शादी के दौरान समाज ने अपनी बच्ची को किसी और को 'दान' करना कैसे स्वीकार कर लिया है।

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हालांकि, सबसे दिलचस्प बात यह है कि, उनकी शादी में न केवल तपस्या के परिवार के सदस्य इस प्रथा को अस्वीकार करने के लिए सहमत हुए थे, बल्कि उनके 'आईएफएस' दूल्हे गरवित ने भी उनका समर्थन किया था।

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'न्यूज 18' की रिपोर्ट के अनुसार, तपस्या के पिता का मानना ​​है कि, समाज में इस तरह की रस्में बेटियों को उनके पिता के घर और सम्पत्ति से बेदखल करने के लिए बनाई गई थी। उन्होंने यहां तक ​​कहा कि, बेटी के लिए दान शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा शादी में और कई ऐसी रस्में भी होती हैं, जो बताती हैं कि, समाज महिलाओं को किस नजर से देखता है। एक शादी प्यार, साथ और सम्मान का प्रतीक होता है, न कि 'कन्यादान' जैसी रस्मों के साथ चलते रहने का।

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फिलहाल, हमें आईएएस अधिकारी दुल्हन तपस्या का ये फैसला बिल्कुल सही लगा। वैसे, आपकी इसके बारे में क्या राय है? हमें कमेंट करके जरूर बताएं, साथ ही कोई सुझाव हो तो अवश्य दें।

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